
उत्तराखंड भारत का वह प्रदेश है जो न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि यहां के लोगों की सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत भी देश के लिए मिसाल है। आज हम एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़े हैं, जहां उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने वाला देश के पहले राज्यों में से एक बन गया है। यह निर्णय न केवल कानूनी सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों को मजबूती देने का भी प्रतीक है।
समान नागरिक संहिता का मूल उद्देश्य देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है, जो धर्म, जाति, लिंग और समुदाय से ऊपर उठकर सभी को समान अधिकार और कर्तव्य प्रदान करे। यह संहिता विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति के अधिकार जैसे मामलों में एकरूपता लाने का प्रयास करती है। उत्तराखंड में यूसीसी का लागू होना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो राज्य के नागरिकों को एक समान कानूनी व्यवस्था के तहत लाने का संकल्प लेता है।
हमारे संविधान के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता की परिकल्पना की गई है, जो राज्य को यह निर्देश देता है कि वह देश के सभी नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता बनाने का प्रयास करे। उत्तराखंड सरकार ने इस संवैधानिक दृष्टिकोण को अपनाते हुए यूसीसी को लागू करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय न केवल कानूनी एकरूपता लाने के लिए है, बल्कि सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए भी है।
यूसीसी का लागू होना विशेष रूप से महिलाओं के लिए एक बड़ा सशक्तिकरण कदम है। अब तक, विभिन्न धर्मों के व्यक्तिगत कानूनों में महिलाओं के अधिकारों को लेकर असमानताएं थीं। यूसीसी के माध्यम से, महिलाओं को विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति के मामलों में समान अधिकार मिलेंगे। यह कदम महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा और उन्हें समानता का अधिकार देगा।
उत्तराखंड में यूसीसी को लागू करने का निर्णय लेते समय हमने सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया। हमने यह सुनिश्चित किया कि इस संहिता का उद्देश्य किसी भी समुदाय या धर्म के अधिकारों को कम करना नहीं है, बल्कि सभी को समान अधिकार और कर्तव्य प्रदान करना है। यह कदम सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों पर आधारित है, जो हमारे संविधान की मूल भावना को दर्शाता है।
उत्तराखंड सरकार का यह निर्णय देश के अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल बनेगा। हमारा उद्देश्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना है, जहां हर नागरिक को समान अधिकार मिलें और कानून के समक्ष सभी समान हों। यूसीसी का लागू होना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उत्तराखंड को एक प्रगतिशील और समावेशी समाज के रूप में स्थापित करेगा।
हम उत्तराखंड के लोगों से आह्वान करते हैं कि वे इस ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करें और सामाजिक एकता और समानता के इस मिशन में सहयोग दें। यह कदम न केवल उत्तराखंड के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक नई दिशा का सूचक है। हमें विश्वास है कि यूसीसी के माध्यम से हम एक ऐसे समाज का निर्माण करेंगे, जहां न्याय, समानता और एकता का साम्राज्य हो।